Tuesday, November 3, 2009

ऐसो खेल रच्यो मेरे दाता ज्यों देखूं वाँ तू को तू।।

ऐसी भूल दुनिया के अन्दर साबूत करणी करता तू।

ऐसो खेल रच्यो मेरे दाता ज्यों देखूं वाँ तू को तू।। (टेक)

कीड़ी में नानो बन बैठो हाथी में तू मोटो क्यों?

बन महावत ने माथे बेठो हांकणवाळो तू को तू।।

ऐसो खेल...

दाता में दाता बन बैठो भिखारी के भेळो तू।

ले झोळी ने मागण लागो देवावाळो दाता तू।।

ऐसो खेल...

चोरों में तू चोर बन बेठो बदमाशों के भेळो तू।

ले झोळी ने मागण लागो देवावाळो दाता तू।।

ऐसो खेल...

नर नारी में एक विराजे दुनियाँ में दो दिखे क्यूं?

बन बाळक ने रोवा लागो राखणवाळो तू को तू।।

ऐसो खेल...

जल थल में तू ही विराजे जंत भूत के भेळो तू।

कहत कबीर सुनो भाई साधो गुरु भी बन के बेठो तू।।

ऐसो खेल...

ॐ

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