
भारतभूमि ऋषि-मुनियों, अवतारों की भूमि है। पहले लोग यहाँ मिलते तो राम-राम कहकर एक दूसरे का अभिवादन करते थे। दो बार राम कहने के पीछे कितना सुंदर अर्थ छुपा है कि सामने वाला व्यक्ति तथा मुझमें दोनों में उसी राम परमात्मा ईश्वर की चेतना है, उसे प्रणाम हो! ऐसी दिव्य भावना को प्रेम कहते हैं। निर्दोष, निष्कपट, निःस्वार्थ, निर्वासनिक स्नेह को प्रेम कहते हैं। इस प्रकार एक दूसरे से मिलने पर भी ईश्वर की याद ताजा हो जाती थी पर आज ऐसी भावना तो दूर की बात है, पतन करने वाले आकर्षण को ही प्रेम माना जाने लगा है। 14 फरवरी को पश्चिमी देशों में युवक युवतियाँ एक दूसरे को ग्रीटिंग कार्डस, फूल आदि देकर वेलेन्टाइन डे मनाते हैं। यौन जीवन संबंधी परम्परागत नैतिक मूल्यों का त्याग करने वाले देशों की चारित्रिक सम्पदा नष्ट होने का मुख्य कारण ऐसे वेलेन्टाइन डे हैं जो लोगों को अनैतिक जीवन जीने को प्रोत्साहित करते हैं। इससे उन देशों का अधःपतन हुआ है। इससे जो समस्याएँ पैदा हुईं, उनको मिटाने के लिए वहाँ की सरकारों को स्कूलों में केवल संयम अभियानों पर करोड़ों डालर खर्च करने पर भी सफलता नहीं मिलती। अब यह कुप्रथा हमारे भारत में भी पैर जमा रही है। हमें अपने परम्परागत नैतिक मूल्यों की रक्षा करने के लिए ऐसे वेलेन्टाइन डे का बहिष्कार करना चाहिए। इस संदर्भ में विश्ववंदनीय पूज्य संत श्री आसारामजी बापू ने की की है एक नयी पहल – 'मातृ-पितृ पूजन दिवस'।
परम पूज्य संत श्री आसारामजी जी बापू के कृपापात्र सतशिष्य श्री राम भाई जी के सानिध्य में युवा सेवा संघ हिसार द्वारा मातृ-पितृ पूजन दिवस कार्यक्रम का आयोजन 14 फरबरी 2012 को शाम 3 बजे से 5 बजे तक स्थानीय ओ.पी. जिंदल पार्क, नजदीक बस स्टैंड, हिसार में किया जायेगा. आप सभी सादर आमंत्रित है.अधिक जानकारी के लिए संपर्क करे: 094662-64467, 092156-05002, 094167-96217
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