Saturday, February 18, 2012

शिवरात्रि की रात 'ॐ नमः शिवाय' जप



शिवजी का पत्रम-पुष्पम् से पूजन करके मन से मन का संतोष करें, फिर ॐ नमः शिवाय.... ॐ नमः शिवाय.... शांति से जप करते गये। इस जप का बड़ा भारी महत्त्व है। अमुक मंत्र की अमुक प्रकार की रात्रि को शांत अवस्था में, जब वायुवेग न हो आप सौ माला जप करते हैं तो आपको कुछ-न-कुछ दिव्य अनुभव होंगे। अगर वायु-संबंधी बीमारी हैं तो'बं बं बं बं बं' सवा लाख जप करते हो तो अस्सी प्रकार की वायु-संबंधी बीमारियाँ गायब !

ॐ नमः शिवाय मंत्र तो सब बोलते हैं लेकिन इसका छंद कौन सा है, इसके ऋषि कौन हैं, इसके देवता कौन हैं, इसका बीज क्या है, इसकी शक्ति क्या है, इसका कीलक क्या है – यह मैं बता देता हूँ।

अथ ॐ नमः शिवाय मंत्र।
वामदेव ऋषिः।
पंक्तिः छंदः।
शिवो देवता।
ॐ बीजम्।
नमः शक्तिः।
शिवाय कीलकम्।

अर्थात्

ॐ नमः शिवाय का कीलक है'शिवाय', 'नमः' है शक्ति, ॐ है बीज... हम इस उद्देश्य से
(मन ही मन अपना उद्देश्य बोलें) शिवजी का मंत्र जप रहे हैं – ऐसा संकल्प करके जप किया जाय तो उसी संकल्प की पूर्ति में मंत्र की शक्ति काम देगी।


Link : https://www.facebook.com/notes/mohit-kumar/proper-way-of-jap-on-shivratri-nightmust-read-for-full-shiv-ratri-benifit/114983671910614

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