Sunday, September 20, 2009

|| ॐ श्री सदगुरु परमात्मने नमः ||

सदगुरुदेव



साथी-सगे सब स्वार्थ के हैं, स्वार्थ का संसार है |

निःस्वार्थ सदगुरुदेव हैं, सच्चा वही हितकार है ||

ईश्वरकृपा होवे तभी, सदगुरुकृपा जब होये है |

सदगुरु कृपा बिनु ईश भी, नहीं मैल मन का धोय है ||



निर्जीव सारे शास्त्र सच्चा मार्ग ही दिखलाय है |

दृढ़ ग्रन्थि की जड़ खोलने कि युक्ति नहीं बतलाय है ||

निस्संग होने के सबब से ईश भी रुक जाय है |

गुरु गाँठ खोलन रीति तो, गुरुदेव ही बतलाय हैं ||



गुरुदेव अदभुत रूप हैं, परधाम माहीं विराजते |

उपदेश देने सत्य का, इस लोक में आ जावते ||

दुर्गम्य का अनुभव करा, भय से परे ले जावते |

परधाम में पहुँचाय कर, स्वराज्यपद दिलवावते ||



छुड़वाय कर सब कामना, कर देय हैं निष्कामना |

सब कामनाओं का बता घर, पूर्ण करते कामना ||

मिथ्या विषयसुख से हटा, सुखसिंधु देते हैं बता |

सुखसिंधु जल से पूर्ण अपना, आप देते हैं जता ||



तन इन्द्रियाँ मन बुद्धि सब, संबंध छुड़वा देय हैं |

अणु ग्रहण करत सूर्य ज्युँ, जग माहीं चमका देय है ||

आधार सारे विश्व का, सबका ही जो अध्यक्ष है |

सो ही बनाते जीव को, ब्रह्माण्ड जिसका साक्ष है ||



इक तुच्छ वस्तु छीनकर, आपत्तियाँ सब मेट कर |

प्याला पिला कर अमृत का, मर को बनाते हैं अमर ||

सब भाँति से कृत कृत्य कर, परतंत्र को निज तंत्र कर |

अधिपति रहित देते बना, भय से छुड़ा करते निड़र ||

कंचन बनाते देह को, रज मैल सब हर लेय हैं |

ले कांच कच्चा हाथ से, कौश्टब मणि दे देय हैं ||

इस लोक से परलोक से, सब कर्म से सब धर्म से |

परतत्त्व में पहुँचाय कर, ऊँचा करे हैं सर्व से ||



सदगुरु जिसे मिल जाये सो ही, धन्य है जग मन्य है ||

सुर सिद्ध उसको पूजते, ता सम न कोऊ अन्य है ||

अधिकारी हो गुरुदेव से, उपदेश जो नर पाय है |

भोला! तरे संसार से, नहीं गर्भ में फ़िर आय है ||



ईश्वर कृपा से, गुरु कृपा से, मर्म मैंने पा लिया |

ज्ञानाग्नि में अज्ञान कूड़ा, भस्म सब है कर दिया ||

अब हो गया है स्वस्थ सम्यक, लेष नहीं भ्रांत है |

शंका हुइ निर्मूल सब, अब चित्त मेरा शांत है ||



-- भोले बाबा

ज़रा ठहरो गुरुदेवा, अभी दिल भरा ही नहीं

ज़रा ठहरो गुरुदेवा, अभी दिल भरा ही नहीं, अभी दिल भरा ही नहीं |

करें दर्शन, तुम्हारा हम, अभी दिल भरा ही नहीं, अभी दिल भरा ही नहीं ||१||


ये मतलब की है सब दुनिया हमें भरमायेगी, हमें भरमायेगी |

तेरी रहमत हमको गुरुवर, खुद ही तरायेगी, खुद ही तरायेगी |

यूँ हमसे दूर ना जाओ, अभी दिल भरा ही नहीं, अभी दिल भरा ही नहीं ||२||


एक झलक तेरी मेरे गुरुवर, बिगड़ी बनायेगी, बिगड़ी बनायेगी |

तेरी कृपा, सब प्यासों की, प्यास बुझायेगी, प्यास बुझायेगी |

ज़रा हम पर नजर ड़ालो, अभी दिल भरा ही नहीं, अभी दिल भरा ही नहीं ||३||


तुम जाओगे तो ये आँखें नीर बहायेंगी, नीर बहायेंगी |

मेरे जीवन में गुरुवर, उदासी छायेगी, उदासी छायेगी |

रहम की अब, नजर ड़ालो, अभी दिल भरा ही नहीं, अभी दिल भरा ही नहीं ||४||


तेरी कृपा ही हम को, तुम से मिलायेगी, तुम से मिलायेगी |

तेरी सेवा मेरा जीवन सफ़ल बनायेगी, सफ़ल बनायेगी |

ज़रा अमृत तो बरसाओ, अभी दिल भरा ही नहीं, अभी दिल भरा ही नहीं ||५||



तेरी करुणा ही भक्ति की, लगन लगायेगी, लगन लगायेगी |

तेरी दृष्टि मन मंदिर, में ज्योत जलायेगी, ज्योत जलायेगी |

तेरी मुस्कान से गुरुवर, अभी दिल भरा ही नहीं, अभी दिल भरा ही नहीं ||६||


पीड़ा विरह की हमको प्रभु, खूब सतायेगी, खूब सतायेगी |

बिना तेरे हृदय की कलियाँ, ये मुरझायेगी, ये मुरझायेगी |

विनय स्वीकार तुम कर लो, अभी दिल भरा ही नहीं, अभी दिल भरा ही नहीं ||७||


ज़रा ठहरो गुरुदेवा, अभी दिल भरा ही नहीं, अभी दिल भरा ही नहीं |

करें दर्शन, तुम्हारा हम, अभी दिल भरा ही नहीं, अभी दिल भरा ही नहीं ||

ऐसा तेरा प्यार गुरुवर

ऐसा तेरा प्यार गुरुवर भूल न पायें
बार बार मिलने को मन ललचाये..

बार बार तुम ने दिखाया सच का चेहरा
आप का ही ज्ञान प्रभु सब से गहरा
आप के चरणों में दिल है ठहरा
आप से ही लगता है हरपल सुनहरा

आप के ही चरणों में मस्तक झुकायें
ऐसा तेरा प्यार गुरुवर भूल न पायें..


तुम ही हो गुरुवर जीवन हमारा
सम्भव नहीं अब तो तुम बिन गुजारा
छूटेगा कभी अब ना दामन तुम्हारा
जैसे भी हैं तेरे हैं देना तुम सहारा

आप की छवि ही हृदय में बसाये
ऐसा तेरा प्यार गुरुवर भूल न पायें..

तुम बिन ये जीवन का सूना विराना
श्रद्धा भक्ति के सुख से था बेगाना
तुम्हें पाके लगता है प्यारा सुहाना
आप का रिश्ता लगे सदियों पुराना

आप की याद में हर दिन बितायें
आप से कभी हम दूर न जायें
ऐसा तेरा प्यार गुरुवर भूल न पायें

इतनी ही रहमत प्रभु हम पे करना
दिल ये हमारा तुम श्रद्धा से भरना
आप के सुमिरन में जीना मरना
आप ही हमारे दोष दुर्गुण हरना

आप में ही हम अपनी लगन ये लगायें
ऐसा तेरा प्यार गुरुवर भूल न पायें..

तुमसे ही छू कर के आती हैं हवायें
महकते तन मन ये, महकती फिज़ायें
तुमसे ही खुशियों के दीप जगमगायें
ज्ञान से हृदय के कमल हैं खिलाये
आप के ही चरणो में मस्तक झुकायें

आप की ही यादों में हर पल बितायें
ऐसा तेरा प्यार गुरुवर भूल न पायें..

भक्ति की धारा गुरुवर बहाते

भक्ति की धारा गुरुवर बहाते

गंगा सा पावन दिल को बनाते

मेरी भी विनती सुनो गुरुदेवा

चरणों में रखना मेरे गुरुदेवा

भक्ति बढ़ाओ गुरुदेव

मेरी प्रीति बढ़ाओ गुरुदेव



गंगा सा पावन दिल को बनाते



१) तुम साथ हो तो डर हमको कैसा

तुम जो कहो अब करें हम तो वैसा

अपना बनाओ गुरुदेव

दिल में बस जाओ गुरुदेव



गंगा सा पावन दिल को बनाते



२) तीरथ वहीं जहाँ तेरे कदम हैं

तुम हो हमारे ये कृपा क्या कम है

सपनों में आओ गुरुदेव

दरस दिखाओ गुरुदेव



भक्ति की धारा गुरुवर बहाते



३) हम तो थे नश्वर की प्राप्ति में फूले

छूटेगा सबकुछ हम ये तो थे भूले

सत्य बताओ गुरुदेव

मेरी भ्रांति मिटाओ गुरुदेव



गंगा सा पावन दिल को बनाते



४) नाम ये तेरा हमारी है ताकत

कट जाते दुख सारे टल जाए आफत

ध्यान में डुबाओ गुरुदेव

अनहद सुनाओ गुरुदेव



गंगा सा पावन दिल को बनाते



५) किसमें भला है पता ना है हमको

सौंप दी है डोरी अब हमने ये तुमको

हमको बचाओ गुरुदेव

पार लगाओ गुरुदेव



भक्ति की धारा गुरुवर बहाते

गंगा सा पावन दिल को बनाते

Friday, September 18, 2009

जगमग-जगमग ज्योत जले मेरे बापू के दरबार में |

जगमग-जगमग ज्योत जले मेरे बापू के दरबार में |
आओ रे भक्तों भक्ति कर लो बापू के दरबार में ||
जगमग-जगमग ज्योत जले मेरे बापू के दरबार में

निस दिन तेरा नाम पुकारें, निस दिन तेरी ज्योत जलावें |
आओ रे भक्तों भक्ति कर लो बापू के दरबार में ||
जगमग-जगमग ज्योत जले मेरे बापू के दरबार में

ऐसी अंतर ज्योत जलवो, हम दीनों को पार लगा दो -२
आओ रे भक्तों भक्ति कर लो बापू के दरबार में ||
जगमग-जगमग ज्योत जले मेरे बापू के दरबार में

जिसने बापू का नाम पुकारा, दूर हुआ उसका अंधियारा |
आओ रे भक्तों भक्ति कर लो बापू के दरबार में ||
जगमग-जगमग ज्योत जले मेरे बापू के दरबार में -२

जगमग-जगमग ज्योत जले मेरे बापू के दरबार में -२ |
मेरे बापू के दरबार में, मेरे साईं के दरबार में ||

वह भक्त ही क्या जो तुमसे मिलने की दुआ न करे ?

वह भक्त ही क्या जो तुमसे मिलने की दुआ न करे ?

भूल प्रभु को जिंदा रहूँ कभी ये खुदा न करे ।

हे गुरुवर !

लगाया जो रंग भक्ति का, उसे छूटने न देना ।

गुरु तेरी याद का दामन, कभी छूटने न देना ॥

हर साँस में तुम और तुम्हारा नाम रहे ।

प्रीति की यह डोरी, कभी टूटने न देना ॥

श्रद्धा की यह डोरी, कभी टूटने न देना ।

बढ़ते रहे कदम सदा तेरे ही इशारे पर ॥

गुरुदेव ! तेरी कृपा का सहारा छूटने न देना।

सच्चे बनें और तरक्की करें हम,

नसीबा हमारी अब रूठने न देना।

देती है धोखा और भुलाती है दुनिया,

भक्ति को अब हमसे लुटने न देना ॥

प्रेम का यह रंग हमें रहे सदा याद,

दूर होकर तुमसे यह कभी घटने न देना।

बडी़ मुश्किल से भरकर रखी है करुणा तुम्हारी....

बडी़ मुश्किल से थामकर रखी है श्रद्धा-भक्ति तुम्हारी....

कृपा का यह पात्र कभी फूटने न देना ॥

लगाया जो रंग भक्ति का उसे छूटने न देना ।

प्रभुप्रीति की यह डोर कभी छूटने न देना ॥

Wednesday, September 16, 2009

आये हो जगत में हमारे लिए गुरु तुम

आये हो जगत में हमारे लिए गुरु तुम

सूरत नूरानी मन में बसी है
ऐसी छवि हो तुम
आये हो जगत में हमारे लिए गुरु तुम

मीरा और शबरी ने गुरु आज्ञा मानी
ज्ञानेश्वर जी ने भी गुरु महिमा जानी
ज्ञान बदते , मार्ग दिखाते .
रब की मूरत हो तुम
आये हो जगत में हमारे लिए गुरु तुम

कितनों को तेरी भक्ति ने तारा
कितनों का तुमने जीवन सवारा
सांसो में बसते, धड़कन चलाते.
सृष्टि के कर्ता हो तुम
आये हो जगत में हमारे लिए गुरु तुम

सच झूठे की हमको परख नहीं थी
राह सही थी न सोच सही थी
तुमने उबारा, हमको सवारा
सचे हितेषी तो तुम
आये हो जगत में हमारे लिए गुरु तुम

दूर हो तन से परख क्या पड़ता
द्रण निष्ठा से शिष्य आगे है बढता
सपनो में आते हो, अपना बनाते हो
हम सबके इश्वर हो तुम
आये हो जगत में हमारे लिए गुरु तुम

एकलव्य की थी निराली थी रीति
अद्भुत थी आरुणी, धुव की वो प्रीति
साची हो श्रद्दा , अटल भरोसा
हमको भी दे दो तुम
आये हो जगत में हमारे लिए गुरु तुम

कृपा के बदले में हम तुमको क्या दे हम
चरणों में खुद को ही अर्पण करे हम
ये उपकार करना, दिल में ही रहना
दूर न जाना तुम
आये हो जगत में हमारे लिए गुरु तुम.

तुम बिन कोई न इच्छा रखे हम
जैसा भी चाहो वही करे हम
तुमको ही ध्याये, तुमको ही पाए
हम सबकी मंजिल तो तुम
आये हो जगत में हमारे लिए गुरु तुम