Friday, September 18, 2009

वह भक्त ही क्या जो तुमसे मिलने की दुआ न करे ?

वह भक्त ही क्या जो तुमसे मिलने की दुआ न करे ?

भूल प्रभु को जिंदा रहूँ कभी ये खुदा न करे ।

हे गुरुवर !

लगाया जो रंग भक्ति का, उसे छूटने न देना ।

गुरु तेरी याद का दामन, कभी छूटने न देना ॥

हर साँस में तुम और तुम्हारा नाम रहे ।

प्रीति की यह डोरी, कभी टूटने न देना ॥

श्रद्धा की यह डोरी, कभी टूटने न देना ।

बढ़ते रहे कदम सदा तेरे ही इशारे पर ॥

गुरुदेव ! तेरी कृपा का सहारा छूटने न देना।

सच्चे बनें और तरक्की करें हम,

नसीबा हमारी अब रूठने न देना।

देती है धोखा और भुलाती है दुनिया,

भक्ति को अब हमसे लुटने न देना ॥

प्रेम का यह रंग हमें रहे सदा याद,

दूर होकर तुमसे यह कभी घटने न देना।

बडी़ मुश्किल से भरकर रखी है करुणा तुम्हारी....

बडी़ मुश्किल से थामकर रखी है श्रद्धा-भक्ति तुम्हारी....

कृपा का यह पात्र कभी फूटने न देना ॥

लगाया जो रंग भक्ति का उसे छूटने न देना ।

प्रभुप्रीति की यह डोर कभी छूटने न देना ॥

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