Tuesday, September 15, 2009

पछताओगे गुरुदर छोड़ के गर तुम जाओगे

पछताओगे गुरुदर छोड़ के गर तुम जाओगे
हर करनी का सम्यक रहते फल तुम पाओगे!
गुरु की जिसने बात न मानी उसको होती भारी हानि
होता है वो किस्मत वाला जिसने गुरु की महिमा जानी,
गुरु से उच्चा कोई न होवे
पछताओगे गुरुदर..........
हमने हीरा जन्म ये पाया जिसने दिया उसको ही भूलाया
पायी न वो आत्म शान्ति उलझे सब पाने को माया
सब कुछ पाके भी क्यूँ तू सोये
पछताओगे गुरुदर.........
मोती खोके पाए कंकर क्यूँ करता भूले तू भयंकर
तू जन्मा है रजा होकर रहता है क्यूँ रंक तू होकर
क्यूँ खुद ही कांटे तू बोए
पछताओगे गुरुदर.........
गुरु ज्ञान में मार ले गोटा क्यूँ ऐसा अवसर है खोता
करले मानव गुरु की भक्ति गुरु बिना कोई पार न होता
गुरु ही मन का मैल है धोये
पछताओगे गुरुदर.....
बिचडे हैं उस प्यारे से हम तभी मिले हमको हैं ये गम
उनकी करते गुरुवार रक्षा श्रद्धा जिनकी न हो कभी कम
सुबह हुई अब क्यूँ तू सोए
पछताओगे गुरुदर......
साथ न तेरा देंगे कोई चाहे ब्रह्म शंकर हुई
तांडव करेगी मृतु सर पर रक्षक न तेरे होवे कोई
आखिर में तू क्यूँ है सोए
पछताओगे गुरुदर......

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